मंगलवार, 25 जून 2013

आप सौ साल जियें पापा

-गणेश पाण्डेय 

छोड़ दीजिए पापा
पान के बीड़े चबाना
और तरह-तरह के जर्दे की
गमकने वाली खुशबू।

गदेली पर अँगूठे से
तम्बाकू-चूना मलना, ठोंकना
और होंठ के भीतर दाबकर
चुनचुनाहट के मजे लेना
बंद कीजिए पापा बंद।

मुझे नहीं पसंद है पापा
मम्मी को नहीं पसंद है पापा।

ये लीजिए पापा सौंफ
इलायची लीजिए पापा
आप सौ साल जियें पापा।

सफेद फ्रॉकों वाली गुड़िया जैसी
दस बरस की बिटिया
करती है प्रार्थना।

(1987)

( पहले संग्रह ‘ अटा पड़ा था दुख का हाट ’ से।)






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