मंगलवार, 7 अगस्त 2018

भारत माता की बेटियां

- गणेश पाण्डेय

कुशीनगर में
बुद्ध चिरनिद्रा में थे
और पावा नगर में महावीर
उन्हें किसी ने जगाकर बताया नहीं
कि मुजफ्फरपुर से देवरिया तक
और देवरिया से न जाने कहां-कहां तक
पहुंच गये हैं स्त्री-अस्मिता-भक्षी

बुद्ध को 
किसी ने नहीं बताया
कि ढ़ाई हजार साल बाद
गणतंत्र किन हाथों में आ गया है

जागेंगे बुद्ध
जागेंगे महावीर
तो क्या पूछेंगे नहीं 
कि यह कैसी आजादी है
आखिर यह कैसा विकास है
क्या यही है कल्याणकारी राज्य

सभ्यता 
और मनुष्यता में
छिड़ गयी है खूनी जंग
संस्कृति के निकल आए हैं नुकीले दांत
राजनीति के नाखून बहुत लंबे हो गये हैं
कांक्रीट और लोहे से बनी बस्ती
और हिंस्र पशुओं के जंगल में 
कम फर्क रह गया है

हर जगह 
बेखौफ विचरण कर रहा है
बूढ़े और जवान गिद्धों का झुंड
एक-एक को चुन-चुन कर खा रहा है
बालिका गृह की नवदेवियों की देह
और उनकी जीवित आत्मा

ये बेटियां
क्या भारत माता की बेटियां नहीं हैं
कोई दुर्गा है कोई लक्ष्मी कोई सरस्वती
कोई नूर कोई मरियम कोई मलका
अब और क्या प्रमाण चाहिए
इनके वुजूद का
आखिर सरकारें क्यों मान लेती हैं
इन्हें जीते जी मुर्दा 
कोई भी आए
नोच खाए

ऐसी
सरकारें 
जो बेटियों की लाज नहीं बचा सकतीं
खुद लाज से मर क्यों नहीं जातीं।