रविवार, 30 मार्च 2014

-गणेश पाण्डेय

आ मेरे रकीब

कि आ दिल के मेरे करीब थोड़ा और
जी भर के वार कर तुझे शम्शीर दे दूँ आ

आ कि तन्हा आ के मुझे कर ले गिरिफ्तार

आ तुझे जंजीर दे दूँ

आ कि थक गये कंधे नफरत लिये-लिये

तुझे प्यार दे दूँ आ

आ न डर

आ मेरे दुश्मन
कि आ दिल के मेरे करीब थोड़ा और
आ तुझे कश्मीर दे दूँ

आ।


(‘जल में’ से)












1 टिप्पणी:

  1. आप की टिप्पणी के बाद कविता भी पढ़ी । साफ़ और सम्प्रेषणीय कविता है जो पाठकों तक पहुँचती है या पहुँचेगी । आप को बधाई देता हूँ कि आप कविता की सम्प्रेषणीयता के प्रति सचेत हैं ।

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