रविवार, 9 अक्तूबर 2016

रावण का पुतला

- गणेश पाण्डेय
                                          
रामलीला मैदान में
अवैध कब्जे की होड़ है
कमेटी के पदाधिकारियों में
आपस में काफी सिर फुटौवल
और तोड़-फोड़़ है
फिर भी किये जा रहे हैं
जैसे-तैसे
रामलीला

कुछ हैं
बस देख रहे हैं
लीलाभाव से
रामलीला
बच्चे हैं कि जिन्हें
बिल्कुल मजा नहीं आता
अब कोई ढ़ंग से
रावण का पुतला ही नहीं जलाता

कहां बीस-बीस फुट के रावण
और कहां चार-चार फुट के
राम जी
मजा आये तो आये कैसे
नये जमाने के बच्चों को
कोई समझाए कैसे
कहां भीमकाय रावण
कहां क्षीणकाय
और अतिशय दुर्बल
राम जी
कहां रामलीला मैदान में
तमाशबीन ज्यादा
और राम जी की सेना में
मुट्ठीभर
कुपोषणग्रस्त
किशोर
न कोई
हनूमान सरीखा बलशाली
न कोई लक्ष्मण
जाम्बवान और सुग्रीव जैसा
न कोई वानर-भालू जैसा
ताकतवर और जुझारू
जैसे चूहों की टुकड़ी चली हो
राम जी के पीछे-पीछे
रावण को जीतने

आखिर इस बेमेल लड़ाई में
बच्चों को
मजा आये तो कैसे आये
राम जी ने
सचमुच रावण को जीता होगा
यकीन आये तो कैसे आये
अपराधियों के अवैध कब्जे के बाद
सौ गुणे सौ मीटर के
छोटे-से
रामलीला मैदान में
इतनी बड़ी लड़ाई हो तो कैसे हो

कोई तो बताये
राम जी
रावण के भीमकाय पुतले में
आग लगायें तो कैसे लगायें
न तीर पकड़ना सीखा
न कहीं निशाना लगाना
न अपने से बड़े कद वाले पर
कभी प्रहार करना
जैसे-तैसे तीर चलायें भी तो
तीर में वह आग कहां से लायें
जो रास्ते में बुझ न जाये
जैसे-तैसे आउल-फाउल
तमाशबीनों और पटाखों की मदद से
आग लगायें भी तो बच्चों को
राम जी की शक्ति पर
यकीन कैसे आये

और जब
बार-बार दशहरे में
देखेंगे
इस तरह
रावण के पुतले को
जलाने की लीला
तो रावण के अंत पर
उन्हें यकीन आये तो कैसे आये
अब या तो राम जी का
और उनकी सेना का कद बढ़ायें
या रावण को छोटा बनायें

पहले काटें उसके पैर
फिर घेर कर मारें
लेकिन
यह सब करने से पहले
राम जी
लंका के सोने में नहीं
अपनी सीता को छुड़ाने में
मन लगायें।

 (‘जापानी बुखार’ से)


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